" सुलहकुल " स़ूफ़िया का मिशन और अमल है। अकबर आज़म ने समझ के मुताबिक़ उस पे अमल किया....। इस इस़्तेलाह (term) को पहली बार ख़्वाजा अब्दुल्लाह मुबारक रह. के ज़िंदगी जीने के तरीक़े पे लागू किया गया। स्वर्गवास:161 हिजरी . दूसरी बार सूफ़ी बुज़ुर्ग ख़्वाजा मारूफ़ कर्ख़ी रह.के हर दीन धर्म के मानने वालों से एक जैसा बर्ताव करने पे लागू की गई। स्वर्गवास: 200 हिजरी। यह इस से भी पहले से सूफिया किराम का मसलक (विचार धारा) है। " सुलहकुल " सीरत ओ सुन्नत ए रब्बुल-आलमीन व रहमतुल्लिल्आलमीन स.है। अब,हिजरी सन् 1445 चल रहा है। मतलब कम से कम 1285 साल से सूफिया किराम इस उसूल पे अमल करते आ रहे हैं। अकबर आज़म 1542 ई में पैदा हुए और 13 अक्तूबर 1605 ई को जहान ए फ़ानी से आलम ए जावदानी को कूच कर गए यानी अकबर आज़म के पैदा होने से 800 ई साल पहले से स़ूफ़िया किराम इस नज़रिए पे अमल करते चले आ रहे थे/हैं।
अकबर आज़म के " सुलहकुल " पालिसी पे अमल या इस विचार/दर्शन ( नज़रिए/अक़िदे) का विरोध करने वाले,अपने दामन को संभालें, दागों को दिखाने के लिए मजबूर ना करें। बल्कि चार,सवा चार सौ साल से गलत बयानियों की तलाफ़ी करें। दीन ए मोहम्मदी को दीन ए मोहम्मदी रहने दें, तिफर्के, सियासत, हुकूमत, तसल्लुत का ज़रिया ना बनाएं ।
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