Wednesday, January 14, 2026

بہاناجھوٹ سے بھی بدتر اور بھیانک ہے–مولی علیؑانقلاب ممبئی،24-12-18

بہاناجھوٹ سے بھی بدتر اور بھیانک ہے–مولی علیؑ
انقلاب ممبئی،24-12-18
सूफ़ी,संत के सत्संग में
बाबा मस्तू (सरकार ए आली), महाराज जी! मैं मुस्लिम दरबार ह़ज़रत मौला अली में 18 साल से मुख्य संत के रूप में कार्यरत हूं. महाराज जी! आप का जो जुगल जोड़ी के प्रति इश्क़ है, इस के कारण हम भी आप के आशिक़ हो गए हैं. हम अल्लाह तआला से एक शुक्रिया और दो दुआएं करते हैं.शुक्रिया यह है कि आप हमारी ज़िंदगी में आए और दुआ यह कि अल्लाह तआला और मौला अली सरकार आप को शिफ़ा अता फ़रमाएं और दुसरी यह की हम भारतियों के जीवन में आप जैसा दिव्य संत एक बार ज़रूर आवे.(बाबा मस्तू सरकार ए आली की संत महाराज जी को पर्ची पढ़के सुनाने वाला चेला: महाराज जी ! इन का आप के प्रति भाव था).
संत महाराज जी : हां,प्रेम,पहले आप का स्वागत करते हैं,धन्यवाद करते हैं कि आप कृपा करके यहां पधारे और हमारी बात सुने हैं. हमें बहुत अच्छा लग रहा है की वास्तविक धर्म का स्वरूप इतना विस्तरित होना चाहिए कि छोटी छोटी मेड़ों में बंध कर एक दूसरे के प्रती जो राग द्वेषआतमक भाव हैं,उनको मिटा देना चाहिए. हमारे चाहे जो भी धर्म ग्रंथ हों, उन ग्रंथों में आप स्वाध्याय करके देखिए. चाहे हमारे रामायण,गीता,भागवत हो या श्री गुरुवाणी जी हों या आप के जो ग्रंथ हैं.आप उनको ग़ौर से पढ़कर देखिए!भगवान को साक्षी करके‌‌!क्योंकि वह महान भगवत स्वरूप वाणी है.आप उसका जब अर्थ समझना चाहेंगे राग द्वेष से तो अलग निकले गा और आप अपने भगवान को साक्षी करके देखेंगे तो मुझे ऐसा लगता है,विश्राम दोने वाली वाणी बन जाएगी.हां,विश्राम देने वाली.हमारा जो उपासना का स्वरूप है,वह यही है,हम सबकी कि,सब घट घट में उसी को देखो। अगर उस के सिवा और कुछ नज़र आ रहा है,तो अभी,हमें लगता है की अभी हमारी देखने वाली दृष्टि अभी ठीक नहीं है। राग द्वेषआतमक दृष्टि ठीक नहीं है.देखो,आप #जो_नाम लेते हैं,वह हमारे भगवान हैं. हमें दृढ़ विश्वास है,मेरे भगवान के सिवा और कोई नहीं है.वही जिसे हम राम,कृष्ण,हरी बोलते हैं,उसे आप #ऐसा बोलते हैं.उसे ही वाहेगुरु कहते हैं.वही परम-एश्वर है.वही(उसे ही)अलग अलग नामों से उपासक पुकार रहा है.तो बीच में जो राग द्वेषआतमक व्रितियां हैं,वह हमारी हैं,पर्सनल हैं.जैसे बिजली दो तार में चलती है,ऐसे ही राग और द्वेष,अनुकूलता और प्रतिकूलता,मान और अपमान,अपना और पराया,इसी पे माया मन को विचलन कराती है.अगर इन कनेक्शनों को काट दें,फिर आप देख लो,तो आप जीवन मुक्त महापुरुष हो जाओगे.ऐसे महापुरुष हुए हैं जिन की हम चरण वंदना आज भी करते हैं.कहीं भी हों,किसी भी जगह हों,जब उंचाई पे पहुंचते हैं तो सब एक ही नज़र आता है.और जब तक बोध नीची धरा में रहते हैं,तो ऊंचा और नीचा समझ में आता है, अपना और पराया समझ में आता है.पहले तो हम मन से आप को प्रणाम करते हैं कि आप ने वास्तविक धर्म के स्वरूप को समझा और आप यहां तक कृपा करके आए.आप का धन्यवाद है और आप जैसे विशाल ह्रदय वाले यदि आषीष देंगे तो इस जीवन में सामर्थ्य बनी रहेगी कि जो गुरु प्रताप से मिला है,वह वाणी सबको सुनने को मिलेगी.यह तो मरा हुआ शरीर है,किडनी फेल है. लेकिन आप सब संतों की और आप सबकी भागवतिक शक्ती कि यह जीवित रहें और बोलते रहे हैं.इसी लिए जीवित हैं और बोल रहे हैं.आपका, सबका आष...है। मुझे बहुत अच्छा लगा,मुझे इस लिए बहुत अच्छा लगा कि यह जो हम छोटी छोटी मेड़े बनाकर के हम राग द्वेषआतमक व्रितियां धारण करते हैं,यह कभी धर्म नहीं हो सकता,धर्म का बहुत विशाल ह्रदय होता है.आप देखो,हमारे गुरु ग्रंथ साहिब में सब संतों की वाणी है.क्या दिखाया है,गुरु ग्रंथ साहिब क्या दर्शा रहे हैं‌?यही कि हमारा जो स्वरूप है,वह सब की वाणियों में विराजमान है.जो सब संतों की वाणियों में विराजमान है,वही मैं हूं,दूसरा कोई नहीं है.ऐसे ही हमारे जो धर्म ग्रंथ हैं,वह सब एकता सिखाते हैं.अनेक को एक में करके और लीन होजा,यही जीवन मुक्त अवस्था है,चाहे जिस मार्ग का प्रतीक हो‌.आज हम सब अपने मार्गों से भटक रहे हैं,छोटे-छोटे शब्द बोल कर,छोटी-छोटी भावनाओं में,एक दूसरे का अपमान करते हैं,एक दूसरे को हिंसात्मक विरती से देखते हैं.मुझे तो नहीं लगता कि वह धर्मात्मा हैं या वह धर्म का ज्ञान रखने वाले हैं.ऐसा नहीं है.इस लिए हमें बहुत अच्छा लगा कि आप पधारे,आप कृपा करे.तो आप को भी माला पहनाईये,सम्मान किजिए.हम प्रणाम करते हैं आपको कि आप में इतनी हिम्मत आई कि आप कृपा करके यहां तक पधारे ।आं.....




#حیران_کن ! ہرطرح  #پستی میں جاتے ہوئے #لوگ ہر میدان میں 1000سالہ #کامیاب_دور اور 200 سال سے #بدلے جا رہے #افکار و #نظریات و #کارگزاری کا ٹھہر کے #محاسبہ نہیں کرتے . . . . !
دشمنوں کو قطعاً گوارہ نہیں کہ خدا کی عطا
کی گئی دلوں کی حکمرانی ہویا ملکوں کی،آل
محمدؐ کے پاس رہے.پہلے دن سے آج تک،ان سے سب کا سب چھین لینےکے فراق میں لگے رہتے  ہیں . چھین جھپٹ کر اپنی طرح کے بنانے کی کوشش کرتے ہیں.ایسا نہ ہو توجھوٹ و مکاری سے نشانہ تنقید و تنقیص و بہتان بناتےہیں.جو یہ نہ کر سکیں،بے اعتنائی،بے زاری،بےادبی سے منہ پھیر لیتے ہیں.جو یہ نہ کر سکیں،منافقت کی راہ سےچھینا جھپٹی کرنےلگتےہیں.نتیجہ:جنوبی ایشیا کی 200 سالہ تاریخ بتاتی ہےکہ اس راہ سےجانب ہدف بڑھتےہیں.آہستہ آہستہ ملت کی بڑی بھاری اکثریت کو نفاق کے رستے پہ ڈال دیتے ہیں. حق پر کذب و باطل کا غلبہ نظرآنے لگتاہے.اسےہی حق باور کرانے لگتےہیں.حق تعالی غضب مسلط کر دیتا ہے . . . . !         

          

दुश्मनों को क़त़्अन गवारा नहीं कि ख़ुदा की अता की गई दिलों की हुक्मरानी हो या मुल्कों की,आल-ए-रसूल स़.के पास रहे.पहले दिन से आज तक,उनसे सब कुछ छीनने के फ़िराक़ लगे में रहते हैं. छीन छानके अपनी अग़्राज़ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं.ऐसा ना हो तो त़रह़ त़रह़ से निशाना ए तन्क़ीद ओ तन्क़ीस़ ओ तज़्लील बनाते हैं.जो यह ना कर सकें, बे-एतनाई ओ बेअदबी ओ ह़क़ारत से मुंह फेर लेते हैं.जो यह ना कर सकें मुनाफ़्क़त की राह से जड़ काट काट के सब कुछ छीनने लगते हैं.नतीजा: दक्षिण एशिया की दो सो साला तारीख़ बताती है कि इस राह से हदफ़ पा लेते हैं. मिल्लत की भारी अक्सिरयत को निफ़ाक़ के रास्ते पे डाल देते है.वक़ती तौर पे, ह़क़ पर कज़्ब ओ बातिल ग़ल्बा ह़ास़िल कर लेते हैं। ह़क़ तआला का क़हर ओ ग़ज़ब मुसल्लत़ हो जाता है मगर बाज़ नहीं आते. . . . .

مخدوم سید سمنانی قدس سرہ‌ و-808ھ- نےفرمایا:تمام فقرامانند یک نفس ہیں،بالخصوص٭خواجگان چشتیہؓ.اہل تصوف=مسلمان=سنیحنفی،مالکی،شوافع،حنابلہ فقہاؒ کی‌اتنی مانتےہیں جتنی انکے٭بزرگانؓ سلسلہ تصوف نےمانی.یہی اصول نبیؐ،اہلبیت نبیؐ،صحابہؓ سےمنسوب روایات،تفاسیروتراجم قرآن کیلئےبھی ہے.وہی عقائد،تعلیمات وشعائر مانتےہیں جو٭اولیاءﷲنیت کرکے8-10-1200سال قبل جنوبی ایشیا میں لائے-ہماری تہذیب اپنائی ، ہمارے بزرگوں میں گھلمل کر ترویج کئے،ان سےثابت وموافق ہوں،خلاف نا ہوں.ان کی سیرت و سنت رسول اکرمؐ کی سیرت وسنت کانمونہ،انکا اسلام اصل حقیقی اسلام ، ان کے عقائد اسلامی عقائد، ان کی تعلیمات اسلامی تعلیمات اور ان کے شعائر اسلامی شعائر ہیں.جنوبی ایشیا کے مسلمانوں نے ﷲ-رسولؐ-اہلبیت رسولؓ-صحابہؓ اورجسکو بھی جیسا جتنا مانا ، ویسا-اتنا ہی مانا-جیسا-جتنا٭جن کے دل سےسچا ہونے پہ ایمان لانےکےبعد اسلام میں داخل ہوئے تھے٭نےبتایا-سکھایاویسے ہی مانتے رہیں گے.اہل٭حق ایمان وعقائدتعلیمات و شعائر میں تغیر و تبدل نہیں کرتے !       


مخدوم سید سمنانی قدس سرہ‌ و-808ھ- نےفرمایا:تمام فقرامانند یک نفس ہیں،بالخصوص٭خواجگان چشتیہؓ.اہل تصوف=مسلمان=سنیحنفی،مالکی،شوافع،حنابلہ فقہاؒ کی‌اتنی مانتےہیں جتنی انکے٭بزرگانؓ سلسلہ تصوف نےمانی.یہی اصول نبیؐ،اہلبیت نبیؐ،صحابہؓ سےمنسوب روایات،تفاسیروتراجم قرآن کیلئےبھی ہے.وہی عقائد،تعلیمات وشعائر مانتےہیں جو٭اولیاءﷲنیت کرکے8-10-1200سال قبل جنوبی ایشیا میں لائے-ہمارے تہذیبی عناصر اپنائے،مسلمان ہونے والوں میں ملاجلاکر پھیلائے،ان سےثابت  وموافق ہوں،خلاف نا ہوں.انکی سیرت وسنت  نبی اکرمؐ کی سیرت وسنت کانمونہ،انکا اسلام اصل حقیقی اسلام،ان کےعقائد اسلامی عقائد انکی تعلیمات اسلامی تعلیمات اور انکے شعائر اسلامی شعائر ہیں.جنوبی ایشیا کے مسلمانوں نے ﷲ-رسولؐ-اہلبیت رسولؓ-صحابہؓ اورجسکو بھی جیسا جتنا مانا ، ویسا-اتنا ہی مانا-جیسا-جتنا٭جن کے دل سےسچا ہونے پہ ایمان لانےکےبعد اسلام میں داخل ہوئے تھے٭نےبتایا-سکھایاویسے ہی مانتے رہیں گے.اہل٭حق ایمان وعقائدتعلیمات و شعائر میں تغیر و تبدل نہیں کرتے !        

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#پوسٹ_معرض‌_وجود_میں_آنے_کی_وجہ :- ★ 200-150 سال سے جنوبی ایشیا کے اصیل و اولین سنی حنفی مسلمانوں کو ورغلا کر پہلے . . . . . بریلوی، وہاں...