Wednesday, January 14, 2026

इमाम हसन अलैहिस्सलाम को मुआविया ने ज़हर दिलवाके क़त्ल करवाया !

 इमाम हसन अलैहिस्सलाम को मुआविया ने ज़हर दिलवाके क़त्ल करवाया !

इमाम उल मुवर्रिखीन अबुल हसन बिन हुसैन बिन अली अल मसूदी रह० [मतवफ्फह 346 हिजरी] ने 'मरूजुज़्जहब' में सफा नं 363 पर लिखा है कि-
'हजरत हसन रजिअल्लाह अन्हु को उनकी बीवी जअदह बिन असअश बिन कैश किंदी ने जहर दिया था, और उसे मुआविया ने इस काम पर उकसाया था। मुआविया ने उससे कहा था कि अगर उसने यह काम कर दिया तो वह [मुआविया] उसे एक लाख दिरहम देने के अलावा अपने बेटे यजीद से उसकी शादी कर देगा,- जब जआदह ने मुआविया के मिशन के मुताबिक जनाब हसन रजिअल्लाह अन्हु को ज़हर देकर मार डाला तो मुआविया ने उसे वादे के तहत एक लाख दिरहम तो भेज दिए लेकिन इसके साथ यह भी कहलवाया-
'हमें यजीद की जिंदगी अज़ीज़ है अगर इसके साथ तेरी शादी कर दी गई तो तेरे हाथों इसकी जान भी जा सकती है।'
 
तारीख ए अबुल फिदा के सफा नंबर 164 पर भी है कि 'इमाम हसन की वफात की वजह वो जहर है जिसको उसकी बीवी जआदह ने मुआविया के कहने पर दिया था...और जब मुआविया को खबर मिली कि इमाम हसन विस़ाल फ़र्मा गए हैं तो सजदा-ए-शुक्र में गिर पड़ा और खुश हुआ।'

बरेलवी मसलक के मशहूर आलिम-ए-दीन मौलाना शफी ओकाड़वी ने 'यजीद पलीद और इमाम पाक' में सफा नं 188 पर यही बात लिखा है।

मुफ्ती गुलाम रसूल नक्सबंदी (दारुल उलूम कादिरिया जीलानिया, लंदन) ने 'इमाम हसन और खिलाफत ए राशिदा' में सफा नं 185 से 186 पर और फिर सफा नं 190 से 191 पर लिखा है कि 'इमाम हसन को मुआविया ने जहर दिलवाया था।
देखें 👇
https://archive.org/details/ImamEHassanAurKhilafatERashida/page/n183/mode/1up?view=theater

हयात उल हैवान की पहली जिल्द में सफा नं 172 पर इमाम इब्ने खल्कान के हवाले से है कि जब मुआविया ने इमाम हसन अलैहिस्सलाम के विस़ाल की खबर सुनी तो उसके दरबार में बुलंद आवाज में तक्बीर की गूंज सुनाई दी और मुआविया ने कहा आज मेरे दिल को राहत हुई है। फिर सफा 173 पर लिखते हैं कि इमाम हसन का विस़ाल जहर से हुआ 👇
https://archive.org/details/HayatUlHaywan/HAYAAT_UL_HAIWAAN_VOL_1/page/n173/mode/1up?view=theater

सफा 66 पर इमाम खल्कान की इस पूरी इबारत को देखें फिर हैयात उल हैवान के तर्जुमा देखें 👇
https://archive.org/details/2_20220803_20220803_0640/page/n65/mode/1up?view=theater

इमाम शमशुद्दीन ज़हबी ने सियर अलामिन नुबला (3/274) में, इमाम बलाज़री ने अनशाब उल अशराफ (1/389) में, इमाम अहमद नकरी हनफी ने 'किताब दस्तूर उल उलेमा व जामेह उल उलूम फी इस्तलिहात ए अल फुनून (4/50)' में, इमाम इब्ने अल वरदी ने तारीख ए इब्ने वरदी (1/158) में,इमाम जमख्सरी ने रबी उल अबरार में, इमाम अशफ्हानी ने मकातिलित्तालीबीन (1/13 व 20) में, इमाम इब्ने आशम शाफाई ने किताब अल फतूह (4/319) में, इमाम अब्दुल बर्र ने अल इस्तियाब (1/389) में, इमाम सिब्ते इब्ने ज़ौजी ने तजकिरातुल ख्वास में, इमाम इब्ने कसीर दमिश्की ने 'अल बिदाया वन निहाया' में, इमाम इब्ने जरीर तबरी ने तारीख ए तबरी में, इमाम तबरानी ने मुअज्जमल कबीर (3/71, रकम 2694) में, अल्लामा नूरुद्दीन ज़ामी ने शवाहिद उन नबूवत में लिखा है कि मुआविया के उकसाने पर जआदह बिन असअश ने अपने शौहर इमाम हसन अलैहिस्सलाम को ज़हर दिया था।
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